लखनऊ : उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर प्रदेश की राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त किए जाने की खबरों पर चिंता जताते हुए राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अजय राय ने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े घटनाक्रम ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और पूरे शिक्षा जगत में चिंता पैदा की है।
राज्यपाल को लिखे पत्र में अजय राय ने कहा कि प्रदेश की संवैधानिक मुखिया और सभी विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति होने के नाते इस मामले में उनका हस्तक्षेप आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जनकल्याण के उद्देश्य से स्थापित विश्वविद्यालय किसी सरकार, राजनीतिक दल या व्यक्ति की संपत्ति नहीं होते, बल्कि ये देश की बौद्धिक पूंजी, समाज की साझा धरोहर और आने वाली पीढ़ियों की अमानत होते हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा, “सरकारें बदलती हैं, लेकिन शिक्षा संस्थानों की गरिमा, निरंतरता और उपयोगिता नहीं बदलनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान से जुड़े विवाद का समाधान कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
अजय राय ने संविधान के अनुच्छेद 30(1) का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का मौलिक अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, किसी भी कथित दंडात्मक कार्रवाई के दौरान संविधान की भावना, प्राकृतिक न्याय, सार्वजनिक हित और अनुपातिकता के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय के कई भवनों के ध्वस्तीकरण के कथित निर्णय को न्याय और प्रशासन दोनों की दृष्टि से अनुचित बताया। अजय राय ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्ष 2013 से विधिवत संचालित हो रहा है और इतने वर्षों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर चुका है।
उन्होंने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण यदि भवन विस्तार से जुड़ी किसी आपत्ति को लेकर कार्रवाई करना चाहता था, तो उसे कानूनी प्रक्रिया और तय नियमों के तहत विवाद का समाधान करना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक वर्गों के छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी प्रशासनिक विवाद से सबसे अधिक प्रभावित विद्यार्थियों का भविष्य हो सकता है।
अजय राय ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संस्थान से जुड़े अनेक कर्मचारी और शिक्षक अपनी सेवाओं के माध्यम से अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। इसलिए किसी भी कार्रवाई के व्यापक प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
कांग्रेस नेता ने प्रशासनिक कार्रवाई के दूरगामी प्रभावों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज का निर्णय कल की प्रशासनिक परंपरा बन सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आज स्थापित किए गए मानदंड भविष्य में प्रशासनिक फैसलों का आधार बनते हैं। इसलिए शिक्षा संस्थानों से जुड़े मामलों में ऐसे उदाहरण स्थापित किए जाने चाहिए, जो कानून के शासन के साथ-साथ संस्थागत स्थिरता और जनता के विश्वास को भी मजबूत करें।
अजय राय ने आशंका जताई कि यदि शिक्षा संस्थानों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की परंपरा बनती है, तो भविष्य में सत्ता परिवर्तन के बाद दूसरी सरकारों के कार्यकाल में बनाए गए संस्थानों और भवनों पर भी इसी तरह की कार्रवाई को उचित ठहराया जा सकता है।
अब देखना होगा कि अजय राय के पत्र पर राज्यपाल की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े इस पूरे विवाद में आगे प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

